माईतां रै लाडेसर हो, म्हैं जद कुंवारो काचो हो
रोवणियो रूसणियो रांती, करमीण कुलखणो चांचो हो
खावण-पीवण, खेलण खातर, जामण सूं झोड़ किया करतो
त्योंरी तण तेज ताबियै सूं, ठाकर री ठौड़ लिया करतो
पाणी रो लोटो भर्यो नहीं, जद तांय न हुई सगाई है।
हो बीस बरस तक निरवाळो, के कांस कळेस पिछाणै हो
सोवण नै पिलंग बिछ्यो मिलतो, के लेण-देण नै जाणै हो
म्हैं हुकम दूसरां पर करतो, पण आज हुकम में हालूं हूं
खांतै-पींतै घर डूम जियां, ब्याह बेगी घोड़ो घालूं हूं
म्हैं खुशी हुयो, घर कोड हुयो, रीपियां री हुई ठगाई है।
भाई-भैणा सूं अलग बैठ, म्हैं इकलखोरियो अड़खांतो
थोड़ै सै भोजन मोड़ै पर, भूखो ही जाकर सो जांतो
कर त्यार तोखिया तुरसांई, मां कैंती बडो उलाड़ो है
थाळी बाटकिया दिया फोड़, ओ गाड़ो घणो उजाड़ो है
पर सुख बेगी मर दुख देगी, के नार भली परणाई है।
दफतर जावण रो टेम टळै, म्हैं कहूं तुरंत रोटी पोदे
बीं रै तो भांउ ही कोनी, छोरा छोरी ल्यादे गोदे
भूखो मर आथण घर आऊं, जद चीज बतावै ल्याद्योनी
खुद खा’पी, सुणै न सो जावै, लारै लूखी सूकी कोनी
कंवरा री मां नै कर जोड़ूं, निकळी आखी अकड़ाई है।
अै सीरख सोड़िया सोवण रा, उजळा सा सदा सज्यां रैंता
टाबरिया सारा फाड़ दिया, माईत सदा पैल्यां कैंता
उछताई तेरी रवै नहीं जद घर ग्रिस्थी में पड़ ज्यासी
बै सारी बातां सांच हुई, सूंथण अंगरखी सै बासी
जो कालै साथीड़ा धोती, लाड़ोड़ी खींच बताई है।
म्हैं घर जाकर पूछण लाग्यो, धोती नै गंदी कुण करदी
बोली-कै धोती रो तोड़्यो टाबरियै टट्टी सूं भरदी
म्हैं कियो बावळी धो धोती, घर धर्यो घणो साबण सोडो
बोली पिंडत देख्यो कोनी, क्यूं परणीज्यो बणतो मोडो
म्हैं बोल्यो पाणी घाल बाळ, बोली के मंहदी लगाई है।
म्हैं बोल्यो मिनख जमारो है, आछो खाणो चोखो रैणो
बोली हाथां पो पीस करो, ना मनै सदै है कीं कैणो
म्हैं कियो कुंवारी ही रैंती, क्यूं मेरै सिर मारण तड़क तणी
दो मिलणै खातर भायेला, आ देख करै हंसाई है।
दूजै दिन रूस’र जा सोगी, बोली मेरी आसंग कोनी
म्हैं बोल्यो थांरो के दूखै, बोली बैठो सिर दाबोनी
म्हैं सिर दाबण नै त्यार हुयो, बण सिर ढक पांव पसार दिया
बोली पग मां सरणा चालै, साथळ गोडा सै टूट रिया
म्हैं किसै कूवै में पड़ूं अबै, दे मुट्ठी जोर दबाई है।
म्हैं पूछ्यो कीं सावळ है के? बोली पींडी काठी दाबो
अगूंठा रा कटका काढ़ो, है ताव उतारो ना गाभो
लुपरियो सीरो कर ल्यावो, म्हैं चाटूं टाबर ले आगै
थे पाणी भर घड़िया ल्यावो, धोती लैंघा धोवो सागै
ना कियां करूं गाळी देवै, जाणू के चाची ताई है।
आ कदे पी’र माईतां रै, मेळां डोळां में सज जावै
आ कदे बरत अर चौथ करै, गुड़ खांड कणक चावळ खावै
आ जापै सवाड़ सूंठ गूंद खुद खावै उजळा भोग भरै
पन्दरै दिन पूरा हुवै नहीं, मेरी तिणखा नै खतम करै
पण म्हैं रोटी सुख अेक रोज, हंस मौज मजै ना खाई है।
म्हैं सारो जोर पिता धाप्यो, अपणा सै ओदा जता चिता
म्हैं ग्राम पंच मुखियो माणस, तूं गिणै नहीं कीं बात बता
छै छै दिन तक भूखो मारै, लूखो बासी खाणो देवै
ना कहै सुणै मामळ राखै, तूं तां कर नांव मेरो लेवै
बोलै गतराड़ी पग मांडी, लाठी ले लारै धाई है।
बै ओजूं तांई ना परण्यां वानै ही म्हारो कैणो है
बिन देखै नारी कळखारी, मिल जाय कुंवारो रैणो है
सादी सूं पैली लाज छोड़, जीवण साथण री खोज करो
म्हैं डूब्यो थानैं चेताऊं, नूंवै मारग सूं वधू वरो
म्हैं माईतां नैं जो जाण्यां, के जाणै मनै लुगाई है।