विसनु नाम है सूर हम, हृदै प्रकास अपार।

संसार नाम अंध कूप है, उर में घौर अंधार॥

विष्णु का नाम सूर्य के समान तेज है और हृदय में प्रकाश करता है। यह

संसार अंधा कुआं के समान है। सांसारिकता में फंसे लोगों के हृदय में घोर अंधेरा होता है।

स्रोत
  • पोथी : ऊदोजी अड़ींग की बाणी ,
  • सिरजक : ऊदोजी अड़ींग ,
  • संपादक : आचार्य कृष्णानंद ,
  • प्रकाशक : जांभाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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