हइवर गइवर पाइदळ, पुहवि पारावार।

गोरी राउ गिरि आसनउ, गउ गढ़ गंजणहार॥

शिवदास कहता है- बादशाह अलप खां की सेना में घोड़ों, हाथियों तथा पैदल सैनिकों की संख्या इतनी अधिक थी कि पृथ्वी के छोर तक जमीन नहीं केवल सेना ही नजर आती थी, अर्थात उस सेना में असंख्य सैनिक थे। इस तरह गढ़ का भंजन करने वाला बादशाह अलपखां गोरी, पर्वत के निपट पहुंचा।

स्रोत
  • पोथी : अचलदास खिची री वचनिका ,
  • सिरजक : शिवदास गाडण ,
  • संपादक : शम्भूसिंह मनोहर ,
  • प्रकाशक : राजस्थान प्राच्यविधा प्रतिष्ठान, जोधपुर
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