दक्खिण उतर देस, पूरब नइ पच्छिम तणा।

खड़िया खउँदाळिम कटक, नमिया सकळ नरेस॥

बादशाह होशंगशाह की सेना के प्रयाण करने पर पूर्व-पश्चिम तथा उत्तरऔर दक्षिण के समस्त नरेश उसके आगे नतमस्तक हो गए अर्थात अधीनता स्वीकार कर ली।

स्रोत
  • पोथी : अचलदास खिची री वचनिका ,
  • सिरजक : शिवदास गाडण ,
  • संपादक : शम्भूसिंह मनोहर ,
  • प्रकाशक : राजस्थान प्राच्यविधा प्रतिष्ठान, जोधपुर
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