मुख मुंदे रहु मुरलिया,कहा करत उतपात।

तेरे हाँसी घर बसी,औरन के घर जात॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थानी भाषा और साहित्य ,
  • सिरजक : नागरीदास ,
  • संपादक : मोतीलाल मनारिया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार, जोधपुर ,
  • संस्करण : छठा संस्करण
जुड़्योड़ा विसै