माया के रंग जे गये, ते बहुरि आये।

दादू माया डाकिनी, इन केते खाये॥

स्रोत
  • पोथी : श्री दादू वाणी (माया का अंग) ,
  • सिरजक : दादूदयाल ,
  • संपादक : नारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : श्री दादू दयालु महासभा , जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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