काळी पीळी हो रई, अब पाणी री धार।

भूल ग्यो क्यूं मिनख, अब पाणी आळो प्यार॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मधुकर गौड ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-34
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