खंडायो पिण न खंडे लिगार, नित सदा रहें एक धार।
एहवो छे द्रव्य जीव अखंड, अखी थकों रहे इण मंड॥
भावार्थ :- खण्ड करने पर यह जीव द्रव्य किंचित भी खण्डित नहीं होता, यह सदा एक धार रहता है। ऐसा यह द्रव्य जीव अखण्ड पदार्थ है और इस सृष्टि में अक्षय बना रहता है।