नीला ! मो पहली पड़ै, कीध उतावळ काय?

वाल्हा कवळां पाळियो, पड़तो मोय पुगाय॥

स्रोत
  • पोथी : वीर सतसई ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : नरोत्तमदास स्वामी, नरेन्द्र भानावत, लक्ष्मी कमल ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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