नाद श्रवण ध्यावंत, तजइ मृग प्राण ततख्खिण।
इंद्री परस गयंद, वास अलि मरइ विचख्खण।
रसना स्वाद विलग्गि, मीन बज्झइ देखन्ता।
लोयण लुबुध पतंग, ए पड़इ पावक पेखन्ता।
मृग मीन भंवर कुंजर पतंग, ए सब विणसइ इक्क रसि।
छीहल कहइ रे लोइया, इंदी राखउ अप्प वसि॥