जरैं अपेय अचळ जळ जाणे, तोड़े अरर मुच्छ कर ताणे।

मथे जवन दळ उदधिखीर मित, अचळ हुवो तिलतिल सुर अंचित॥

स्रोत
  • पोथी : वंश भास्कर भाग 3 ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : डॉ. चंद्रप्रकाश देवल ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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