फरि चडै फौजां कळि कनौजां चढ़े चोजां चित्तअे।

आया ऊसस्से धींग धस्से जुड़ण जस्से चित्तअे॥

बह कूंत बंबळ झिले झळहळ सूंडि लळवळ सज्जअे।

कमधां पमारां खग्ग-धारां भड़ ऊधारां भज्जअै॥

स्रोत
  • पोथी : जाडा मेहड़ू ग्रंथावली ,
  • सिरजक : जाड़ा मेहड़ू ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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