मेवाड़ां मारवां, वहै साबळ वीजूजळ।
तांणि वाग रवि तांम, दुगम देखंत दमंगळ।
पिंड फूटै रत पड़ै, पियै चौसठि भर पत्तर।
सिर तूटां सूरिमा, सझै संकर गळि चौसर।
रिख हसै वरै वर अच्छरा, कमंध लोह स्रीहथ करै।
जमदढ़ां खंजर पिंजरां जड़ै, कळ ‘भीम’ ‘गजबंध’ करै॥