हळदघाट कागद बणा
कलम बणा खांडौह।
मुगल रगत स्याही बणा
मजब फरज मांड्यौह।
राखूं मान मजीत रौ,
राखूं काण कुराण।
चढ़ आया मेवाड़ पर,
हूं न राखूं मुगळाण।
धिक-धिक रै अकबर थनै,
थारी व्ही बुद्धि आंधीह।
जठै बाप हाथ राखी बंधी,
बठै लड़ण कमर बांधीह।
हज-तीरथ मारग अळग,
देश-धरम इक आन।
हळदघाट शामल कर्या
मां मुगला रगत सवान।
अजां सुणी मसजित गिया,
झालर सुण मंदराह।
पण रणभैरी सुण राण री,
मां साथ गिया समरांह।
गोता भल न्यारी सुणी,
न्यारी सुणी कुराण।
लड़बा मरबा देश हित,
साथ सुण्यौ फरमाण।
सिर साफौ हरियौ बंध्यौ,
खां कटबा लीधौह।
पण हथ रातो धज राण रौ,
नह झुकबा दीधौह।
क्रतब मजब सूरी अजब,
रण दहु नह छांडैह।
मुख अल्ला अकबर कहै,
हथ अकबर बाढैह।
नह धोकै इकलिंग नै,
न कहु देव प्रणाम
देव रहै देवळ रहै,
सूरि शशतर रै सलाम।
हलदघाट हिन्दू पठाण,
मिल धर्म ऊंचौ कीधौह।
मजब अळग री बात की,
रगत मिला दीधोह।
गज चढ़िया पतशाह रै,
सूर खगां ताणैह।
चेटक चढिया राण रै,
निज सिर बजराणैह।