दिन दिन हे सखि दिन दिन नव नव भोग,
पूरे हे सखि पूरे हे सिंघल सुख सहु जी।
रलीया हे सखि रलिया दिन ने रात,
रहतां हे सखि रहतां हे दिवस बहु जी॥