मयमत्ती उनमत गज गेलि, चालि हरावइ हंसां ढेलि।

ठमकि ठमकि रिमझिम पय ठवइ, देखो तस वसि कुंण नवि हवइ ?

स्रोत
  • पोथी : सदयवत्स सावलिंगा चउपई ,
  • सिरजक : कवि केशव 'कीर्तिवर्धन' ,
  • संपादक : डॉ. मंजुलाल मजमुदार ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै