राजस्थान में अबार आं दिनां जिका सिल्प रा धंधा पनप रैया है, वां में ब्लूपॉटरी अेक खास धंधौ है। जैपर में न्यारै-न्यारै अेंपोरियमां में बरस दीठ करीब दस लाख रिपियां रौ ब्लूपॉटरी रौ सामांन बिकै। कलात्मक ढंग सूं बण्योड़ा फूटरा-फूटरा फूलदांन, अेस्ट्रै, पेन स्टेंड, टी सेट, जार अर प्लेटां देसी अर विदेसी जात्रियां नै घणा दाय आवै। आं माथै ब्लू रंग री चितरांमकारी अर बेलबूंटा वांरा मन मोय लेवै। इण वास्तै बजार में आं चीजां री हर बखत मांग बणी रैवै।

ब्लूपॉटरी रै धंधै री सरूआत भारत में नीं होय’र सै सूं पैली विदेसां में होई। आजसूं करीब चार-पांच हजार बरसां पैली मिस्र देस में जमीन री खुदाई करतां इण सिल्प री बण्योड़ी चीजां रा कीं टुकड़ा मिळ्या हा। मुगल बादसावां री टैम में कला ईरान-अफगानिस्तान होवती थकी भारत आई। सरूपोत में कलात्मक चीजां रौ प्रचलन राजा-महाराजावां नवाबां-बादसावां अर अमीर-उमरावां रै रै घरां तांईं रैयौ। पण होळै-होळै इणरौ प्रचलन आम जनता में ईं होवण लाग्यौ।

जैपर में ब्लूपॉटरी रौ सिल्प सै सूं पैली किंया अर कद आयौ, इणरी अेक दिलचस्प दास्तांन है। अैड़ी बात कैयी जावै के जैपर रा भूतपूरव महाराजा रामसिंघजी अेक कलाप्रेमी नरेस हा। वांरै बखत में अेकर बयाना रा दो कुम्हार कालूराम अर चूडामणि जैपर नगर में पतंग उडावण आया। अै दोन्यूं जणा नांमी कारीगर हा। महाराजा नै इण बात री जांण पड़ी तौ वै वांनै बुलाय’र ब्लूपॉटरी री धंधौ सीखण सारू दिल्ली रै अेक नांमी कारीगर भोळै कुम्हार कनै भेज दिया। वै दोन्यूं जणा धंधौ सीख’र आया अर सै सूं पैली जैपर में वै धंधौ सरू कियौ। बरसां लग पीढ़ी-दर-पीढ़ी वांरै घर में धंधौ चालतौ रैयौ। सेवट सन् 1963 में जैपर में 'रामसिंघ सिल्पसाळा' री थरपणा होई अर ब्लूपॉटरी रै सिल्प सीखावण रौ धंधौ सरू होयौ। केन्द्रीय हस्तकला मंडल इण कांम वास्तै 75 हजार रिपियां री मदद दीवी अर महाराज मांनसिंघजी री तरफ सूं मकांन रौ प्रबंध होयौ। अबै तौ सिल्पसाळा बंद होयगी है, पण आज सिल्प सैकड़ूं कारीगरां रै रुजगार रौ साधन बण्योड़ौ है।

ब्लूपॉटरी रौ धंधौ कोई आदमी पांचेक हजार रिपिया खरच करनै आपरै घर में सरू कर सकै। इणरी बणावट में काबल-टाक्साईड कांम मे आवै, जिकौ दीखण में काळै रंग रौ होवै, पण पकियां पछै नीलवरणौ होय जावै। भूरै तांमड़ै सूं त्यार कियोड़ौ हळकौ नीलौ रंग इण में काम में लिरीजै। बरतण बणावण सारू माटी ब्यावर अर नीमकाथांणा सूं आवै। इण माटी में कसीलौ गूंद, साजी, मेट (मुलतांनी माटी) अर काच रौ बुरादौ मिळाय नै त्यार करी जावै। पछै चाक माथै बरतण उतारनै वांनै भट्टी में पकाया जावै। सगळौ कांम भौत सुथराई अर मैणत सूं कियौ जावै। जैपर में कांम करण वाळौ कारीगर म्हीनै रा आठ सौ रिपियां सूं लगाय नै अठारै सौ रिपियां तांईं कमावै। जैपर रा किरपालसिंघजी इण कांम रा महारती है, इण सारू वांनै सन् 1974 में रास्ट्रपति री तरफ सूं ईनांम मिळ्यौ अर पदमश्री री उपाध मिळी।

ब्लूपॉटरी रा बरतण फगत देखण री चीज है। कोई चीजबस्त घाल’र राखण में इणरौ कोई उपयोग नीं होय सकै। इण भांत अै कलात्मक चीजां रोहीड़ै रै फूलां ज्यूं दीखण में तौ घणी फूटरी है, पण कांम री कीं कोनी। फगत सो-केसां में घाल’र राखण री चीजां मात्र है।

उत्तरप्रदेस रै खुरजा नगर में ईं ब्लूपॉटरी रौ धंधौ चालै। उत्तरप्रदेस री सरकार उठै रा कारीगरां नै इण कांम सारू त्यार कियोडी माटी सस्ती कीमत में देवै। पण राजस्थांन रा कारीगर नै हरेक चीज बजार सूं मोल लावणी पड़ै। बजार में अणूंतौ मूंघीवाड़ौ बढवा सूं अै सगळी चीजां अबै घणी मूंघी मिळै। जैपर में ब्लूपॉटरी रै धंधै में कांम करणिया कारीगर कुसळ चितरांमकार है, वै घणकरा कुमावत है। अै लोग परंपरा सूं हवेलियां में भींती-चितरांम बणावण रौ कांम करता।

पुराणै बखत में ब्लूपॉटरी री चीजां राजा-रईसां रै घरां में इज लाधती। पण आज इणनै आंम आदमी खरीदण लागग्यौ है। इणसूं कीमती विदेसी मुद्रा तौ मिळै इज, इणरै साथै सैकड़ूं कारीगरां रै रुजगार रौ साधन बणै। इण वास्तै सरकार नै इण कांनी ध्यांन देय'नै इण सिल्प नै हर तरै सूं मदद देवतां थकां पनपावण री कोसिस करणी चाहिजै।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : विजय मेहता ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन
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