आंवल नामक झाड़ीनुमा पौधा पूरे राजस्थान में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम केसिया ओरिक्लाटा (Cassia auriculata) है। इसे सीज़लपिएसी (Caesalpiniaceae) कुल का पौधा माना जाता है।
आंवल झाड़ी के आकार का होता है, जिसमें अनेक शाखाएं होती हैं। इसकी ऊंचाई दो मीटर तक होती है और इसकी डालियों का रंग गहरा भूरा होता है। इन शाखाओं पर दो-दो के समूह में पत्तियां लगती हैं, जिनकी एक डाली पर संख्या 7 से 9 तक होती है। ये पत्तियां 7 से 10 सेंटीमीटर तक लंबी होती हैं।
आंवल पर पीले रंग के फूल लगते हैं, जो तकरीबन 5 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। फूलों के परिपक्व होने के बाद इनकी फलियां बनती है, जो 7 से 10 सेंटीमीटर तक लंबी होती हैं। ये फलियां 1 से 2 सेंटीमीटर चौड़ी होती हैं। आंवल के पौधे पर फूल और फलियाँ पूरे वर्ष लगती रहती हैं।
इस पौधे की छाल से रंग तैयार करके उसे चमड़ा रंगाई के काम में लिया जाता है। यह रंग प्राकृतिक और गहरा होता है।