बम नृत्य अलवर-भरतपुर जिलों में किया जाता है। इइस नृत्य में एक बड़ा नगाड़ा—जिसकी ऊँचाई लगभग तीन फुट, व्यास लगभग दो फुट का होता है, जिसे ‘बम’ कहा जाता है—का प्रयोग किया जाता है, उसी आधार पर नृत्य का नाम ‘बम’ नृत्य पड़ा। इस बम को खड़े होकर दोनों हाथों में एक जैसे डंडे लेकर बजाया जाता है। होली और फाल्गुन के दिनों की उमंग और नई फसल आने की प्रसन्नता में अलवर-भरतपुर क्षेत्र के पुरुषों द्वारा गाँव की चौपाल में इस नृत्य का आयोजन किया जाता है। इस नृत्य में नर्तक समूह तीन भागों में बंटा होता है। प्रथम भाग में वादक अपने वाद्य यंत्रों के साथ बैठते हैं, नृत्य में नगाड़े के साथ थाली, चिमटा और ढोलक वाद्य यंत्रों का भी वादन किया जाता है, थाली को गिलास के ऊपर ओंधी रखकर दो डंडियों से बजाया जाता है। दूसरे भाग में वादकों के बायीं ओर कलाकारों का एक पंक्ति में बांस के ऊपर बना हुआ, रंग बिरंगा परक होता है। तीसरा भाग या दल गायक और नर्तकों का होता है, जो गाकर स्वछन्द नृत्य करते हैं।
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