सूर कमल वाजिंद सुपने मेल है।

जैसे द्योस अरु रैण कड़ाई तेल है॥

हमहि में सब खोट दोष नहि स्याम कूं॥

हरि हां, वाजिद ऊंच नीच सो बंधे कहो किहि काम कूं॥

स्रोत
  • पोथी : संत सुधा सार (पतिव्रता कौ अंग से उद्धृत) ,
  • सिरजक : वाजिद ,
  • संपादक : वियोगी हरि ,
  • प्रकाशक : मार्तण्ड उपाध्याय, सस्ता साहित्य मंडल,नई दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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