कहा करे उपदेश अज्ञानी जीव कूं।

भई जनम की भूल जपै कि पीव कूं।

सृष्टि भली वाजिद दुहाई राम की।

हरि हां,अंधे आरसि दई कहो किहि काम की॥

स्रोत
  • पोथी : संत सुधा सार (अज्ञान कौ अंग से उद्धृत) ,
  • सिरजक : वाजिद ,
  • संपादक : वियोगी हरि ,
  • प्रकाशक : मार्तण्ड उपाध्याय, सस्ता साहित्य मंडल,नई दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै