भगवान री भगती करतां थकां आत्मा नै दुबारा परमात्मा सूं मिलाणै खातर संतां योग साधना, उपासना, श्रद्धा अर प्रेम आद रो सहारो लियौ। अे संत परमात्मा नै निराकार, अजन्मी, अविनासी अर हरमेस रैवण वाळी मानी। इण कारण उण रो रूप आकार किण भांत हुवै ? बा अजर अमर है तो उण रो जलम किण भांत हो सकै ? बीं नै पावण खातर सगळा बारै रा उपाय बेकार है बो मन अर वाणी रो विसय कोनी बो इन्दि्रयातीत है इण भांत रो अेक भजन ‘मोको कहां ढूंढे रे बंदे में तो तेरे पास रे’ जिण नै ख्यातनांव कलाकार ‘मीर मुखत्यार’ जी आपरी आवाज दिन्ही है, सुणो ओ मीठो भजन To progress on the path of devotion, saints relied on yoga, worship, devotion, and love. They perceived God as formless, unborn, indestructible, and infinite—beyond all physical attributes. This bhajan, 'Moko kahan dhundhein re bande, main to tere paas re,' beautifully encapsulates this sentiment, sung by the renowned artist Mir Mukhtyar. Listen to this divine hymn. #AnjasMahotsav Facebook: https://www.facebook.com/anjasrajasthani Instagram: https://www.instagram.com/anjasrajasthani/ Twitter: https://twitter.com/anjasrajasthani Literature Website: https://anjas.org/ Festival Website: https://anjasmahotsav.org/ ___________________________________________________________________________________अंजस कांई? अंजस राजस्थान री कला, साहित्य अर संस्कृति रो कोस है जिणमें सामिल है— कविता, कथा, कहाणी, बातां, ख्यातां अर लोक रो फूटरापौ। आ खेचळ रेख्ता फाउंडेशन कीन्ही है। अंजस रा अंग अबार इण खेचळ रा कैई न्यारा-न्यारा अंग है: जूनौ कोस: 13वीं सदी सूं ले’र 19वीं सदी रै लिखित साहित्य रो कोस। नूवौ कोस: सन् 1900 सूं आज तांई री लिख्योड़ै साहित्य रो कोस। वाचिक परंपरावां रो कोस जिण मांय सामिल रैसी लोक कथा, लोक गीत, औखाणा, संस्मरण इत्याद। अंजस महोत्सव: राजस्थानी भासा अर साहित्य रो वार्षिकोत्सव। भविख री बाट अंजस राजस्थानी भासा रो सगळा सूं लूंठो कोस बण’र त्यार होवैला अेड़ी आसा है। ओ कोस राजस्थानी पाठक वर्ग नै पूरै रूप सूं बिन्या कोई पैसां रै सब जिग्यां उपलब्ध रैवैला। आ खेचळ कितरी सारथक होवै इण बात री साख तो राजस्थानी रो आखौ पाठक वर्ग तै करेला, पण आपरी सिमरधता रै साथै जारी राजस्थानी रो पैलो उपक्रम है।