वागड़ पर कवितावां

कविता66

म्हारै शैर मएं पण

दिलीप सोमेश्वर

आव रे वरसाद

आभा मेहता 'उर्मिल'

जाजेम

शैलेन्द्र उपाध्याय

चाडिए

आभा मेहता 'उर्मिल'

पूछे थाणा सब सूं

प्रियंका भट्ट

पोस्ट ऑफिस ने जौईनै

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

हैरू

जितेन्द्र जवाहर दवे

पगतू चुकी ग्या

प्रदीप सिंह चौहान

आँक न पाणी

शैलेन्द्र उपाध्याय

म्हूंत ई'ज जाणतो तो के

शैलेन्द्र उपाध्याय

किसान नूं करम

नरेन्द्रपाल जैन

नकटा नी नाक

ललित भट्ट 'दादू'

रजाई

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

बेणेसर ने मेळा मांय

विजय गिरि गोस्वामी 'काव्यदीप'

तोम्बडू

शैलेन्द्र उपाध्याय

अैवो अे आवे दाड़ौ

हर्षिल पाटीदार

मावजी नी वाणी

आभा मेहता 'उर्मिल'

कैवी दीवारी कैवी होरी

द्वारिका वल्लभ जोशी

कविता

मयूर पंवार ‘मयूर’

सूटो सांड

छगन लाल नागर

पतंग

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

अंगास घणं औंसं हैं

घनश्याम प्यासा

आंगास ऊं धरती ने जौवू

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

आँधं अगाड़ी रोई नै

राम पंचाल भारतीय

मेऽरियूऽऽऽ

शैलेन्द्र उपाध्याय

म्हूं वागड़ी

नीता चौबीसा

तकलू

प्रदीप सिंह चौहान

अकुड़ो

सूर्यकरण ‘सरोज’ सोनी

हरख

शैलेन्द्र उपाध्याय

सेतोरे वेरा सती

छगन लाल नागर

मन नो मैल

जगमालसिंह सिसोदिया

टैम टैम नीं वात

राम पंचाल भारतीय

भैंत

आभा मेहता 'उर्मिल'

जमारौ

हर्षिल पाटीदार

ताळं नी कुंचिये

हर्षिल पाटीदार

केटलू ताजू थातू

नलिनी नाथ भट्ट

गीता नूं ज्ञान

राम पंचाल भारतीय

नर

मधुकर बनकोड़ा

आस नी दरोकड़ी

घनश्याम प्यासा

मनक

विजय गिरि गोस्वामी 'काव्यदीप'

नदी

प्रदीप भट्ट

मंदर

प्रदीप भट्ट

बुसट

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

मेह बाबा तू म्हैर कर

राम पंचाल भारतीय

बेणीसर नो बेणकू

राम पंचाल भारतीय