राजस्थानी री नूंवी कहाणी
(आज रै आदमी री ओळखाण री कोसीस में)
कहाणी जीवण री जरूरत है। इणी कारण जद सूं सृष्टि बणी, बीं बगत सूं ई कहाणी री सरूआत हुयगी। सृष्टि रो बणणो खुद एक कहाणी है। कहाणी रै विकास नै लगातार गति देवण रो काम कर्यो भाषा। भाषा रै जरियै कहाणी समाज में चावी हुई।