राजस्थानी भाषा पर लेख
पटा, परवाना, रुक्का, खत, पत्र आदि राजस्थानी भासा रौ नाम लेवतां ही म्हारै निजरां आगै राजस्थान रो वो नक्सो आ जावै जिण में लाखों लोग आपरै टाबरपणै सूं लगाय बूढापै तक आपरी मायड़ भासा बोलता रैहवै, इण भासा रो नाम लेवतां वै पुराणा नाम याद आवै जिकां सूं भारत
‘राजस्थान’ नांव तो रजवाड़ां कै अेकमेक होयां पाछै पड़्यो, पण राजस्थानी की अेकरूप संस्कृति का ऊजळा चतराम तो पीढ्यां सूं भक्ति, वीरता अर सरजण का संस्कार जगार्या छै। बोल्यां को आंतरो तो पूरा मुलक में थोड़ा-थोड़ा फासला पै दीखै छै, पण हरदा की हलोळ में तो
अनुवाद रै बारै में कैवण नै लोग अठा तांईं कैवै के अेक भासा सूं दूजी भासा में किणी रचना रौ हूबहू अनुवाद व्है इज नी सकै, मूळ भासा में रचना रौ जिको प्रभाव व्है, बौ दूजी भासा में उणी ढाळै नीं आ सकै। पण तौ ई अनुवाद रौ काम कित्तौ महताऊ व्है, आ बात इण सूं ई