राजस्थानी कवि पर लेख
‘राजस्थान’ नांव तो रजवाड़ां कै अेकमेक होयां पाछै पड़्यो, पण राजस्थानी की अेकरूप संस्कृति का ऊजळा चतराम तो पीढ्यां सूं भक्ति, वीरता अर सरजण का संस्कार जगार्या छै। बोल्यां को आंतरो तो पूरा मुलक में थोड़ा-थोड़ा फासला पै दीखै छै, पण हरदा की हलोळ में तो