भारतीय कविता पर लेख
आ बात म्हनै घणी संजीदा अर अरथाऊ लागी के ‘अपरंच’ रौ अेक आवगौ अंक आठवैं दसक री राजस्थानी कविता– खासकर सन् 1971 में प्रकासित ‘राजस्थानी-अेक’ री कवितावां, उणरी भूमिका अर असर माथै केंद्रित राख पूरसल विचार करीजै। निस्चै ई औ विचार म्हनै राजस्थानी नुंवी कविता
राजस्थान रौ त्याग, स्वाभिमान, बळिदान, वीरता, ईश भक्ति अर मिनखपणौ जगचावौ। रवि ठाकुर जिसा विश्व कवि अर संवेदनशीळ व्यक्ति राजस्थान रै इण गुणां सूं घणा प्रभावित रह्या। वे आंतरिक भाव सूं राजस्थान सागै जुड़्योड़ा हा। वांरौ अंतस इसै उदात्त मानवीय गुणां सूं