राजस्थानी नाटक अर रंगमंच
नाट्य सास्तर रा प्रणेता भरत मुनि नाटक री परिभासा देता हुवा बीं नै लोकवृत रौ अनुकरण बतायौ है—'लोकवृत्तानुकरण नाट्यम्'। ईं में नाटक रै वास्तै दो बातां जरूरी मानी है—(1) लोकवृत्त या कोई कथा, का'णी या जीवण में हुयोड़ी वै घटनावां जो एक का'णी रै रूप में हुवै