देस विदेस नै जीत लियो तलवार दिखाकर लूट मचायो।

टाबर लोग लुगाय-पताय नै बंदी बणा कर खूब सतायो।

मूंछ री पूंछ मरोड़-मरोड़ अजय हुयो’र घणो हरसायो।

वीर अजेय मुकेस बण्यो तन नै नहीं, जीत मनां पर छायो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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