केंसें तुम मृगणी के गन निगण भरथ,
केसे तुम भीलणी के झूठें फल खाये थे।
केंसें तुम द्रोपदी की टेर सुनि द्वारिका में,
केसें गजराज काज नाग पर धाए थे।
केंसें तुम भीखम को पण राख्यो भारथ में ?
केसे राजा उग्रसेन बंध में छोराए थे।
मेरी बेर कांन तुम कान बंद बैठ रहें,
दीनबंधु दीनानाथ काहि कु कहाए थे॥