बालस वेस रहें सबही दिन, मान करें न कछू दिन लाजें।
सेत सरोज सुं हेत धरे, अति ऊजल चीर सरीरहि छाजें।
वारिज कोस वन्यो मदन ग्रह वीरज बास विराजें।
देह लही मनमत्त निरंतर रंभा के रूप पदमणी छाजें॥