या मगरी मग री तगरी, नगरी न गरी सगरी बगरी हे।
वाट परी डगरी डगरी, खगरी खगरी कगरी अगरी हे।
सीस भरी गगरी पगरी, पगरी घुघरी उगरी भु गरी हे।
ब्रह्ममुनि द्रगरी दगरी, लगरी लगरी फगरी रगरी हे॥
में अटकी अटकी नटकी, चटकी चटकी मटकी फटकी हु।
घुंघटकी घटकी रटकी, लटकी लटकी तटकी कटकी हु।
ज्यों पटकी थटकी थटकी, खटकी खटकी हटकी हटकी हूं।
ब्रह्म लज्यो झटकी झटकी, वटकी वटकी जटकी जटकी हूं॥
जोबनमें खनमें दिनमें, धनमें तनमें कनमें मनमें जूं।
माखनमें खनमें न नमें धनमें धनमें उनमें गनमें जूं।
आपनमें पनमें रनमें, छनमें छनमें जनमें अ नमें जुं।
ब्रह्ममुनि फनमें थन, मेडनमें भनमें भनमें चनमें ज्यूं॥
मुखपें अलके झलके, ललके व्रजत्रिय मीलकें कलके कलके ही।
कुंडलके तलके चलके मनु, मिन मिनहुके बलके हलके ही।
नारी चली जलके छलके, गलके नलके वलके दलके ही।
ब्रह्ममुनि पलके फलके भलके, सलके डलके ढलके ही॥
नहीं बात पहांनयकी पयकी, लयकी लयकी वयकी वयकी री।
या तयकी तयकी अयकी मयकी मयकी भयकी भयकी री।
हे गयकी गयकी गयकी सयकी, सयकी बयकी बयकी री।
जो खयकी कयकी कयकी, कहे ब्रह्ममुनि जयकी जयकी री॥
आंखु बरी खुबरी लुबरी दुबरी, दुबरी बुबरी गुबरी हे।
हे जुं बरी जुबरी, छुबरी डुबरी डुबरी उबरी तुबरी हे।
में बुबरी थुबरी मुबरी कुबरी, कुबरी कुबरी कुबरी हे॥