आग पड़ै नभ सूं हिम या जळ लोग अनेक जगां पण जावै।

मंगळ गान करै जलमै सुत मोद मनै मिल थाळ बजावै।

रात कई गुजरी अंखियां उण रा हठ पै हर चीज दिलावै।

पूत हुयो हुंसियार मुकेस अबै उण मां अर बाप भुलावै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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