आग पड़ै नभ सूं हिम या जळ लोग अनेक जगां पण जावै।
मंगळ गान करै जलमै सुत मोद मनै मिल थाळ बजावै।
रात कई गुजरी अंखियां उण रा हठ पै हर चीज दिलावै।
पूत हुयो हुंसियार मुकेस अबै उण मां अर बाप भुलावै।