माया जोरिबै कुं जीव तलफत है अतीव,
देस तजि जाय परदेस परखंड जूं।
जंगली जिहाज बैठौ जल निधि मांहि पैसे,
लोभ को मरोर्यौ गाहै गिर पर चंम जू।
भूख सहै प्यास सहै दुर्ज्जन की त्रास सहइ,
तात मात भ्रात छोरि व्है खंड खंड जू।
अैसो लोभी लोभ कै लियै तै दुख सहै कोरि,
कहै जिनहरख न जांणै है त्रिभंड जू॥