देस समाज में सगळा गत जात’र पात री बात पगां में।

सांच रो राज हुवै चहूं ओर नपै धरती मां डगां दो डगां में।

बंधन तोड़ पढै़'र बढ़ै अनुसासन सांच समान सगां मं।

मानव-मानव प्रीत मुकेस फळै जद मानवता जगां में।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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