रोज जमै सड़कां गळियां पर जोड़ सभा सडयंत्र रचावै।
घात हुवै हर बात घणो दिन-रात अठै उतपात मचावै।
वास करै जण लाख करोड़ जगां पग दो डग री नीं पावै।
देख मुकेस महानगरां निजरां पण अेक ही मीत न आवै।