रोज जमै सड़कां गळियां पर जोड़ सभा सडयंत्र रचावै।

घात हुवै हर बात घणो दिन-रात अठै उतपात मचावै।

वास करै जण लाख करोड़ जगां पग दो डग री नीं पावै।

देख मुकेस महानगरां निजरां पण अेक ही मीत आवै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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