जोड़’र तोड़ करोड़ कर्यो धन जीवण नै बिसराय दियो रै।
स्वारथ में रत नीच री संगत देख सुखां पर लाय लगायो।
काम पड्यां अर काम सर्यां बदल्यो तन रंग जिया मन चायो।
सांतरी सांच मुकेस कहे इण रेत बण्यो इण रेत समायो।