अधम न करि मांन मांन कीयै व्है है हांन,
मांन मेरी सीख मांन सुख ग्राही मान रे।
मांनतें रावण राज लंका सूं गयो बेकाज,
कियो है अकाज लाज गई सब जाण रे।
दुर्योधन मान करि हारी सब धर अरि,
मांन तै गयो है मुंज चातुरी की खांणि रे।
कहै जिनहरख न मांन आंण मन मै,
आंणइ तो दसारणभद्र जैसो मांन आंण रे॥