देस री संतान लूटै है खुद रै देस नै

माफिया रै भेस में का अफसरां रै भेस में

किण सूं कैवां लोकतंत्र री इसी हालत हुई

रक्षक ही भक्षक बण्या, नेतावां रै भेस में।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदन केवलिया ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 18
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