रामा पैंडो अति घणो, दूर दिसन्तर देस।

हरि दरसण किम पाइये, संतो दौ उपदेस॥

वस्तु अमोलक रामदास, पहुंच सक्कै कोय।

अनंत सयाणा सुध बिना, आपौ बैठा खोय॥

रामा तरुवर अगम है, अगम फूलियो जाय।

फल लागा सो अगम है, सैणा पच्च रहाय॥

रामदास फल अगम है, सीस दिया सूं खाय।

सिर सूंप्या बिन नालहै, कोटिक करौ उपाय॥

रामदास फल अगम है, तन-मन दीया खाय।

तन-मन दीया बाहिरो, जग में खाली जाय॥

तरुवर केवल ब्रह्मा है मुगत महाफळ होय।

रामदास मन पंछिया, चढ़ कर पाया सोय॥

जन रामा सतगुरु मिल्या, तरुवर दिया बताय।

सुख-सागर में रम रह्या, मुगत महाफळ खाय॥

स्रोत
  • पोथी : श्री रामदास जी की बाणी ,
  • सिरजक : रामदास जी ,
  • संपादक : रामप्रसाद दाधीच 'प्रसाद', हरिदास शास्त्री ,
  • प्रकाशक : श्रीमदाद्य रामस्नेही साहित्य शोध - प्रतिष्ठान, प्रधान पीठ, खेड़ापा, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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