हिन्दू मुसलमान सूं, सब सूं न्यारा थाय।
रामा मिलिया राम सूं, केवल माहिं समाय॥
षट-दरसण क्या भेख सब, क्या हिन्दू मुसलमान।
रामदास सब एक है, पांचतत्त परवान॥
रामदास पख छाड़ दै, निरपख हो लिव लाय।
पांचतत्त का प्राण है, दूजा कह्या न जाय॥
गैबी खैले रामदास, मेरे अंतर मांहि।
उलट समाणा ब्रह्मा में, दूजा कोऊ नाहिं॥
राम-रतन है रामदास, मेरे अंतर माहिं।
अमर अमोलक हीर की, खाण खुली घट माहिं॥
रामदास ढूंढत फिर्या, घर हीरा की हाट।
ऐसा कोई ना मिलै, समझ बनावै साट॥
हीरा घट में नीपणा, निकसी निरभै खाण।
रामदास पारख बिना, ग्राहक कोइ न जाण॥
पद्दारथ पाणै पड़्यौ, रामा राख दुराय।
परखण हारै बाहिरौ, काढ’रु मती बताय॥
रामा सब जग रंक है, निरधन निपट कंगाल।
धनवंता सो जानियौ, हरि हीरा सा माल॥
धन मिलिया धोखा मिट्या पाया राम-दयाल।
रामदास धनवंत भया, भाज गया भव काल॥
रामदास चिंत्रामनी है मेरे घट मांहि।
चाहै सो पल में कटै, धोखौ कोऊ नांहि॥
रामदास सब कूं कह्यौ, सुणज्यौ सब संसार।
परख विहूणा आदमी, कौड़ी हंदा यार॥