रामदास साईं बिना, सब झूठा जंजाळ।

पंडित ताहि जानसी, झूठा भखै जंजाळ॥

साईं सबके बीच में, सब ही का करतार।

पंडित ताहि औळखै, झूठा करे बिचार॥

दुनिया झूठे राचणी, केता करे सरूप।

रामा ताहिं औळखै, घट में अकल अरूप॥

हरि बिन सब हैरान है, तामे फेर सार।

रामदास साची कहे, सब ही झूठ बिचार॥

पंडित सेती मैं कहूं, सब ही झूठी जाण।

रामदास साईं बिना, सब ही है हैरान॥

स्रोत
  • पोथी : श्री रामदास जी की बाणी ,
  • सिरजक : रामदास जी ,
  • संपादक : रामप्रसाद दाधीच 'प्रसाद', हरिदास शास्त्री ,
  • प्रकाशक : श्रीमदाद्य रामस्नेही साहित्य शोध - प्रतिष्ठान, प्रधान पीठ,खेड़ापा जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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