कूवा बाय निवाण खिणाया, लाख किरोड़ां न्याणा।
तिरण करै राजा तुल बैसै, खोसै माल बिड़ाणा।
बीति बात परबी पुळ सोधै, बैसण करै बिवाणा।
लाख बात लेखै नहीं लागै, दया हीण रा दाणा।
भोगळिया बंदा भो-भो बिनसै, जम रै जीव अडाणा।
करणी सूं तेरी काया बिनसै, माटी रै’वै मुसाणा।
नूवां कपड़ा निरमळ न्हावो, पीछै होय पुराणा।
सत सिंघासण सायर तिरग्या, आवटग्या असराणा।
माया थारी बेहद सांवळ, पार नहीं म्हे जाणां।
‘लालू’ कहै परम गुरु सांभळ, म्हे सेवग हांसाणां।