सब संसार आपदा आवट, राखै सोग सरीक।
दया नहीं दाणै भरी से, खाली फिरैं खटीक।
बाड़ी में बेदन बधै, किरपा रा क्या ठीक।
भो सूं भोसागर तिरै, मुकत हुवै तहतीक।
दुरवासा दोषण दियो, आधेनी अमरीक।
तपत लगी तन आपरै, भाग पुरस भजनीक।
‘लालू’ गुरु मेघा गोरखतणी, लोप न जाई लीक।