देखले चतुर नर अब तो नजरभर

घड़ी पल छिन तेरी बीतत उमरिया॥

दीपक की लोय जैसे अंजली तोय तैसे

कब हुं होय थिर जाय रे गुजरिया॥

पशु मृगराज धरे चिड़ियाको बाज हरे

तैसे यमराज करे पड़े खबरिया

पापनसे डर नर हरिका भजन कर

ब्रह्मानन्द मन धर बात रे हमरिया॥

स्रोत
  • पोथी : श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला ,
  • सिरजक : परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द ,
  • प्रकाशक : श्री ब्रह्मानन्द आश्रम पुष्कर, अजमेर
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