बुध ऊजळ लछ साहरा, जोगी झीणी चाल।
खमा खड़ग कड़ियां कसो, बांधो जरणा ढाल॥
ज्ञान गढी में जाबतो, मिंदर मांहि मांहि मुसाल।
जागै चेतन चौहटै, जाका चोर न मुससी माल॥
मोटै मन टोटै गया, नी दी खोई न्याल।
झूठां जलम बिगोइयो, कौड़ी सटै कंगाल॥
आ सोभ्या है सिर सटै, भक्त न हांसी ख्याल।
‘लालू’ गुरु लज्या धणी, पत राखो गोपाल॥