आम ईख नारेळ निपावो, सींचो कांय बबूला।
ओछ पात पापड़ी लागैं, दुख सांसै री सूला।
साधु आया च्यांदणी चौदस, सब जुग जाया मूला।
झीणी पोंन देवता रूपी, भरम्या भूत भूतेला।
झीणी पोंन सूं अन्न ऊपणो, कांय उड़ावो डूला।
निवसी नीर निवाणां पाणी मत चड़ हारा चूला।
लालू भणै अलख रै सरणै, साधु सुरंगा झूला।