राजस्थानी सबदकोस

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वली रो राजस्थानी अर्थ

  • शब्दभेद : सं.स्त्री.

शब्दार्थ

  • चर्म या चमड़ी की सिकुड़न, झुर्री
  • पेट के दोनों ओर पेट के सिकुड़ने से पड़ी हुई लकीर
  • पंक्ति
शब्दभेद/रूपभेद : सं.स्त्री.
  • पहाड़ के नीचे की भूमि, लम्बी भूमि।
  • रेतीलै टीबै पर प्राकृतिक रूप से बनी लहरनुमा उभरी रेखाएं ।
  • रीढ़ की हड्डी, मेरुदंड।
  • सीधा रोपा जाने वाला वह काष्ठ का डंडा जिस पर धनुषाकार लकड़ी रखकर उस पर बैठकर चक्कर काटा जाता है। वि.वि.--देखो 'चकचूंदियौ'
  • रुपया-पैसा। सं.पु.(अ.)