राजस्थानी सबदकोस

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दिसा रो राजस्थानी अर्थ

दिसा

  • शब्दभेद : सं.स्त्री.

शब्दार्थ

  • क्षितिज वृत के किये हुए कल्पित विभागों में से किसी एक ओर के विभाग का विस्तार। वि.वि.--क्षितज वृत के मुख्य चार विभाग माने गये हैं--पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण। पूर्व के ठीक सामने पश्चिम तथा उत्तर के ठीक सामने दक्षिण माना गया है। इन चारों में से प्रत्येक के लिए निम्न पर्यायवाची हैं--पूर्व के लिये इंद्रा (ऐंद्री); पश्चिम के लिये वारुणी; उत्तर के लिये सोमा; और दक्षिण के लिये याम्या। उपर्युक्त चार मुख्य दिशाओं के अतिरिक्त इनके बीच में चार कोण माने गये हैं जिन्हें उपदिशाएं या मध्यदिशाएं कहते हैं, वे निम्न हैं।--
  • पूर्व और दक्षिण के मध्य के कोण को अग्निकोण
  • दक्षिण और पश्चिम के मध्य के कोण कोर् नैऋत्यकोण