तेजोजी चारण
तेजोजी चारण मध्यकालीन रा भगत कवि
तेजोजी चारण मध्यकालीन रा भगत कवि
लाडनूं (नागौर) रै कसूंमी गांव में जलम्या तेजोजी सामौर सांतरा भगत कवि हा।वां मौकळा डिंगळ गीत, कवित्त, हरजस, साखी अर छंदां रौ सिरजण कर्यो।वां री काव्य-सैली घणी सरल अर सहज हुवण रै कारणै लोक में अजे तक घणी चावी है।तेजोजी सामौर रौ काव्य उतरतै मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य में महताऊ ठौड़ राखै।